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पुलिस को संदेह है कि इस पूरे खेल के पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा है, जो अवैध प्रवासियों को भारतीय पहचान दिलाने में मदद करता है
कोलकाता। सीमावर्ती जिले कोचबिहार के दिनहाटा में पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए एक संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिक को गिरफ्तार किया है। आरोपी वर्षों से खुद को भारतीय बताकर न केवल यहां रह रहा था, बल्कि उसने फर्जी तरीके से आधार और मतदाता पहचान पत्र जैसे महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज भी हासिल कर लिए थे।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान उमर फारूक बेपारी के रूप में हुई है, जिसके बारे में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि वह पड़ोसी देश बांग्लादेश की अर्धसैनिक बल अंसार वाहिनी का पूर्व जवान रह चुका है। पुलिस जांच में सामने आया है कि उमर फारूक करीब 10-12 साल पहले अवैध रूप से सीमा पार कर भारत में दाखिल हुआ था। दिनहाटा के चौधरीहाट ग्राम पंचायत इलाके में शरण लेने के बाद उसने एक स्थानीय बुजुर्ग को अपना पिता बताकर कागजों में हेरफेर की और भारतीय नागरिकता के तमाम साक्ष्य जुटा लिए। मामले का खुलासा तब हुआ जब आरोपी ने हाल ही में मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया के दौरान एन्यूमरेशन फॉर्म भरा। उसकी संदिग्ध गतिविधियों को देखते हुए स्थानीय पंचायत ने जिलाधिकारी से शिकायत की, जिसके बाद पिछले साल 4 दिसंबर को थाने में आधिकारिक प्राथमिकी दर्ज की गई। इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब सोशल मीडिया पर उमर फारूक की एक तस्वीर वायरल हुई, जिसमें वह अंसार वाहिनी की आधिकारिक वर्दी पहने और हाथ में आधुनिक बंदूक लिए नजर आ रहा था। इस तस्वीर ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए। काफी समय से फरार चल रहे आरोपी को मंगलवार रात पुलिस ने पुटिमारी इलाके से दबोच लिया। बुधवार को जब उसे अदालत में पेश किया गया, तो उसने खुद को राजनीतिक साजिश का शिकार बताया। आरोपी का दावा है कि वह पहले सत्तारूढ़ दल से जुड़ा था और अब दूरी बनाने के कारण उसे फंसाया जा रहा है। इस गिरफ्तारी के बाद जिले में सियासी घमासान शुरू हो गया है। भाजपा के जिला सह-उपाध्यक्ष बिराज बसु ने सत्तारूढ़ दल पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि उमर फारूक को तृणमूल कांग्रेस का संरक्षण प्राप्त था और लंबे समय से शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही थी।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस के जिला सह-उपाध्यक्ष अब्दुल जलील अहमद ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि आरोपी का पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है और कानून तोडऩे वालों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई का वे स्वागत करते हैं। दिनहाटा के एसडीपीओ धीमान मित्रा ने बताया कि पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि एक विदेशी नागरिक ने भारतीय तंत्र में सेंध लगाकर फर्जी दस्तावेज कैसे बनवाए।
पुलिस को संदेह है कि इस पूरे खेल के पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा है, जो अवैध प्रवासियों को भारतीय पहचान दिलाने में मदद करता है। फिलहाल, पुलिस आरोपी के मोबाइल डेटा और अन्य संपर्कों को खंगाल रही है ताकि उसके नेटवर्क का पूरी तरह खात्मा किया जा सके।